हिंदी साहित्य का इतिहास (History of Hindi Literature)
1. हिंदी साहित्य इतिहास दर्शन
- हिंदी साहित्य का विकास भाषा, संस्कृति और समाज के साथ हुआ।
- इसका इतिहास विभिन्न कालखंडों में विभाजित किया गया है, जो साहित्य की प्रवृत्तियों और रचनाकारों के आधार पर तय किया गया।
2. हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की पद्धतियाँ
- क्रमबद्ध पद्धति: साहित्य को समय के अनुसार विभाजित किया गया (रामचंद्र शुक्ल, हजारी प्रसाद द्विवेदी)।
- विषय आधारित पद्धति: साहित्य को विभिन्न विधाओं (काव्य, कथा, नाटक आदि) में बाँटा गया।
- सामाजिक-सांस्कृतिक पद्धति: साहित्य को सामाजिक बदलाव के संदर्भ में देखा गया।
3. हिंदी साहित्य का काल विभाजन एवं नामकरण
- आदिकाल (वीरगाथा काल) – 1050-1375 ई.
- भक्तिकाल – 1375-1700 ई.
- रीतिकाल – 1700-1900 ई.
- आधुनिक काल – 1900 ई. से वर्तमान तक
4. हिंदी साहित्य के प्रमुख इतिहासकार एवं उनकी रचनाएँ
इतिहासकार | महत्वपूर्ण ग्रंथ |
---|---|
रामचंद्र शुक्ल | हिंदी साहित्य का इतिहास |
हजारी प्रसाद द्विवेदी | हिंदी साहित्य की भूमिका |
अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ | हिंदी साहित्य का इतिहास |
बच्चन सिंह | हिंदी साहित्य का दूसरा इतिहास |
नामवर सिंह | दूसरी परंपरा की खोज |
5. हिंदी साहित्य के प्रमुख काल एवं उनके रचनाकार
(A) आदिकाल (वीरगाथा काल) – 1050-1375 ई.
- मुख्य रूप से वीर रस प्रधान साहित्य।
- प्रमुख रचनाएँ एवं रचनाकार:
- पृथ्वीराज रासो – चंदबरदाई
- बीसलदेव रासो – नयनचंद्र सूरि
- परमाल रासो – जसवीर पंडित
हिंदी भाषा के विविध पक्ष
(B) भक्तिकाल – 1375-1700 ई.
- मुख्य प्रवृत्तियाँ: भक्ति और आध्यात्मिकता पर केंद्रित।
- मुख्य शाखाएँ:
- निर्गुण भक्ति (ज्ञानमार्गी) – कबीर, दादू, गुरु नानक।
- सगुण भक्ति (राम और कृष्ण भक्ति) – तुलसीदास, सूरदास, मीराबाई।
- प्रमुख रचनाएँ एवं रचनाकार:
- साखी, बीजक – कबीर
- रामचरितमानस – तुलसीदास
- सूरसागर – सूरदास
- पदावली – मीराबाई
(C) रीतिकाल – 1700-1900 ई.
- मुख्य प्रवृत्तियाँ: शृंगार रस, नायिका-भेद, अलंकार शैली।
- प्रमुख रचनाएँ एवं रचनाकार:
- काव्य रीति ग्रंथ – केशवदास
- भूषण के छंद – भूषण
- बिहारी सतसई – बिहारीलाल
- रसराज – मतिराम
(D) आधुनिक काल – 1900 ई. से वर्तमान
- प्रमुख प्रवृत्तियाँ:
- भारतेन्दु युग (1850-1900): नवजागरण, देशभक्ति (भारतेन्दु हरिश्चंद्र)।
- द्विवेदी युग (1900-1920): आदर्शवाद, राष्ट्रवाद (माखनलाल चतुर्वेदी, मैथिलीशरण गुप्त)।
- छायावाद (1920-1936): कल्पनात्मकता, प्रकृति प्रेम (जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’)।
- प्रगतिवाद (1936-1950): सामाजिक यथार्थवाद (नागार्जुन, साहीर लुधियानवी)।
- नई कविता (1950-1970): व्यक्तिवाद, प्रयोगवाद (अज्ञेय, शमशेर बहादुर सिंह)।
- आधुनिक साहित्य (1970-वर्तमान): दलित साहित्य, नारीवाद, यथार्थवाद।