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गद्य की प्रमुख विधाएँ एवं उनका विकास (Major genres of prose and their development)
1. कहानी
- विकास:
- हिंदी में कहानियों का प्रारंभ भारतेन्दु युग (19वीं शताब्दी) में हुआ।
- मुंशी प्रेमचंद ने इसे परिपक्व रूप दिया।
- मुख्य प्रवृत्तियाँ:
- आदर्शवाद, यथार्थवाद, मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्रयोगवाद।
- प्रमुख साहित्यकार एवं रचनाएँ:
- मुंशी प्रेमचंद – “पंच परमेश्वर”, “कफन”
- जैनेन्द्र कुमार – “त्यागपत्र”
- अज्ञेय – “गैंग्रीन”
- निर्मल वर्मा – “परिंदे”
- कमलेश्वर – “राजा निरबंसिया”
2. उपन्यास
- विकास:
- हिंदी का पहला उपन्यास “परीक्षा गुरु” (श्रीनिवास दास) था।
- प्रेमचंद ने हिंदी उपन्यास को सामाजिक यथार्थ से जोड़ा।
- मुख्य प्रवृत्तियाँ:
- ऐतिहासिक, सामाजिक, यथार्थवादी, मनोवैज्ञानिक, प्रयोगवादी।
- प्रमुख साहित्यकार एवं रचनाएँ:
- मुंशी प्रेमचंद – “गोदान”, “गबन”
- राहुल सांकृत्यायन – “वोल्गा से गंगा”
- अज्ञेय – “शेखर: एक जीवनी”
- फणीश्वरनाथ रेणु – “मैला आंचल”
- भगवतीचरण वर्मा – “चित्रलेखा”
3. नाटक
- विकास:
- भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने हिंदी नाटक की नींव रखी।
- द्विवेदी युग में नाटकों का सामाजिक और यथार्थवादी रूप सामने आया।
- मुख्य प्रवृत्तियाँ:
- सामाजिक, ऐतिहासिक, यथार्थवादी, प्रयोगवादी।
- प्रमुख साहित्यकार एवं रचनाएँ:
- भारतेन्दु हरिश्चंद्र – “अंधेर नगरी”
- जयशंकर प्रसाद – “स्कंदगुप्त”, “चंद्रगुप्त”
- मोहन राकेश – “आषाढ़ का एक दिन”
- धर्मवीर भारती – “अंधा युग”
- विजय तेंदुलकर – “खामोश! अदालत जारी है”
4. एकांकी (लघु नाटक)
- विकास:
- 20वीं शताब्दी में नाटक से अलग एकांकी का स्वतंत्र विकास हुआ।
- मुख्य प्रवृत्तियाँ:
- संक्षिप्त, प्रभावशाली संवाद, एक घटना पर केंद्रित।
- प्रमुख साहित्यकार एवं रचनाएँ:
- जयशंकर प्रसाद – “संगीत”
- रामकुमार वर्मा – “रक्त तिलक”
- मिथिलेश्वर – “वीर बालक”
- उपेन्द्रनाथ अश्क – “अंजोदीदी”
5. आलोचना
- विकास:
- हिंदी आलोचना का प्रारंभ आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने किया।
- मुख्य प्रवृत्तियाँ:
- काव्यशास्त्र, मनोवैज्ञानिक, समाजशास्त्रीय, मार्क्सवादी।
- प्रमुख साहित्यकार एवं रचनाएँ:
- रामचंद्र शुक्ल – “हिंदी साहित्य का इतिहास”
- नागरीप्रचारिणी सभा – “हिंदी शब्दसागर”
- नामवर सिंह – “दूसरी परंपरा की खोज”
- हजारी प्रसाद द्विवेदी – “हिंदी साहित्य की भूमिका”
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