गद्य की गौण विधाएँ एवं उनका विकास

गद्य की गौण विधाएँ एवं उनका विकास (Secondary genres of prose and their development) 1. आत्मकथा विकास: आत्मकथा का प्रारंभ 19वीं शताब्दी में हुआ। इसमें लेखक अपने जीवन के अनुभवों और घटनाओं का वर्णन करता है। मुख्य प्रवृत्तियाँ: व्यक्तिगत अनुभव, संघर्ष, सामाजिक यथार्थ। प्रमुख साहित्यकार एवं रचनाएँ: महात्मा गांधी – सत्य के प्रयोग जयप्रकाश नारायण … Read more

गद्य की प्रमुख विधाएँ एवं उनका विकास

गद्य की प्रमुख विधाएँ एवं उनका विकास (Major genres of prose and their development) 1. कहानी विकास: हिंदी में कहानियों का प्रारंभ भारतेन्दु युग (19वीं शताब्दी) में हुआ। मुंशी प्रेमचंद ने इसे परिपक्व रूप दिया। मुख्य प्रवृत्तियाँ: आदर्शवाद, यथार्थवाद, मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्रयोगवाद। प्रमुख साहित्यकार एवं रचनाएँ: मुंशी प्रेमचंद – “पंच परमेश्वर”, “कफन” जैनेन्द्र कुमार – … Read more

हिंदी भाषा के विविध पक्ष

हिंदी भाषा के विविध पक्ष (Various aspects of Hindi language) 1. बोली और मानक भाषा बोली: किसी क्षेत्र विशेष में बोली जाने वाली भाषा का रूप, जैसे – अवधी, ब्रजभाषा, भोजपुरी। मानक भाषा: वह भाषा, जिसे आधिकारिक रूप से नियमबद्ध किया गया हो, जैसे – खड़ीबोली हिंदी। 2. हिंदी की स्थिति राजभाषा: भारत सरकार की … Read more

हिंदी का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

हिंदी का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य (History of Hindi) 1. प्राचीन भारतीय आयभाषाएँ संस्कृत: वैदिक और शास्त्रीय रूपों में विकसित, धर्म और साहित्य की प्रमुख भाषा। प्राकृत भाषाएँ: संस्कृत से विकसित हुईं, बोलचाल में प्रयुक्त होती थीं। 2. मध्यकालीन भारतीय आयभाषाएँ पाली: बौद्ध धर्म की भाषा, सरल और आम जनता द्वारा बोली जाने वाली। प्राकृत: संस्कृत से … Read more