गद्य की गौण विधाएँ एवं उनका विकास
गद्य की गौण विधाएँ एवं उनका विकास (Secondary genres of prose and their development) 1. आत्मकथा विकास: आत्मकथा का प्रारंभ 19वीं शताब्दी में हुआ। इसमें लेखक अपने जीवन के अनुभवों और घटनाओं का वर्णन करता है। मुख्य प्रवृत्तियाँ: व्यक्तिगत अनुभव, संघर्ष, सामाजिक यथार्थ। प्रमुख साहित्यकार एवं रचनाएँ: महात्मा गांधी – सत्य के प्रयोग जयप्रकाश नारायण … Read more