मेहरानगढ़ किले का इतिहास (History of Mehrangarh Fort)
राजस्थान में कई किले स्थित है और सभी किलों का अपना वैभव और इतिहास है, लेकिन जोधपुर में स्थित मेहरानगढ़ किला(Mehrangarh Fort) इतिहास (History) में अपनी अलग छाप छोड़ता है |
इसकी नींव 1459 ईस्वी में राव जोधा ने रखी थी, और तब से यह किला युद्ध, वीरता, और शाही वैभव की कहानियों का गवाह रहा है | आइए, जानते है इस किले के इतिहास की कुछ झलकियाँ :
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आरंभिक इतिहास:
- राव जोधा(Rao Jodha) ने मंडोर किले (Mandor Fort) से अपनी राजधानी को जोधपुर(Jodhpur) स्थानांतरित किया और सन 1459 इसवी में मेहरानगढ़ किले की नींव रखी |
- 17वीं शताब्दी तक यह किला विभिन्न शासकों के अधीन जारी रहा और उन सभी ने इस किले में कुछ न कुछ परिवर्तन और नया निर्माण किया, जिनमें राव माला देव और महाराजा जसवंत सिंह शामिल हैं |
- किले की ऊंची दीवारें और सात प्रवेश द्वार इसे आक्रमणकारियों से बचाने के लिए बनाए गए थे | इनमें से सबसे प्रसिद्ध है जयपोल, जिस पर 1730 में मुगलों के साथ हुए युद्ध के निशान आज भी देखे जा सकते हैं |
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युद्ध और वीरता के किस्से:
- मेहरानगढ़ कई ऐतिहासिक लड़ाइयों का गवाह रहा है, जिनमें मुगलों के साथ हुए युद्ध सबसे उल्लेखनीय हैं |
- रानी चंपावती (Rani Champavati) की वीरता की गाथा इसी किले से जुड़ी है |
- किले के अंदर “छत्तियों का चौक” उन 31 रानियों की समाधि स्थल है जो की अपने पति महाराजा मान सिंह के जौहर में साथ सती हो गई थीं | यह वीरता और निष्ठा का एक स्थायी स्मारक है |
शाही वैभव और कला की झलक:
- किले के अंदर कई शानदार महल हैं, जो राजपूत वास्तुकला और शिल्पकला के बेहतरीन उदाहरण हैं |
- मोती महल, फूल महल, और शीश महल अपनी कलात्मक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं |
- इन महलों को नक्काशीदार संगमरमर, जटिल चित्रकारी, और सुंदर झरोखों से सजाया गया है |
- ये महल उस शाही जीवन शैली की झलक देते हैं जो कभी यहाँ हुआ करती थी |
द्वितीय विश्व युद्ध
स्वतंत्रता के बाद मेहरानगढ़:
- भारत की स्वतंत्रता के बाद, मेहरानगढ़ किले को एक संग्रहालय में बदल दिया गया | आज यह जोधपुर के सबसे लोकप्रिय पर्यटक स्थलों में से एक है |
- संग्रहालय में राजपूत इतिहास, हथियार, वस्त्र, और चित्रों का एक विशाल संग्रह है | ये प्रदर्शनी हमें उस समय के रहन-सहन और संस्कृति की गहरी जानकारी देती हैं |
प्रथम विश्व युद्ध
मेहरानगढ़ किला सिर्फ एक संरचना नहीं, बल्कि राजस्थान के इतिहास और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। यह वीरता, वैभव, और कला का मिश्रण है, जो हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है।
कुछ अतिरिक्त रोचक बातें :
- किले के अंदर चामुंडा माताजी का मंदिर है, जो किले की कुलदेवी है |
- किले से पाकिस्तान तक का नजारा दिखाई देता है |
- मेहरानगढ़ दुर्ग में कई हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है |
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