अजमेर का इतिहास: राजाओं, सूफी संतों और शानदार किलों की कहानी (Updated 2026)
अजमेर का इतिहास: राजाओं, सूफी संतों और शानदार किलों की कहानी (Updated 2026)
राजस्थान का ऐतिहासिक शहर अजमेर (Ajmer) अपने समृद्ध अतीत, धार्मिक महत्व और स्थापत्य धरोहर के कारण विशेष पहचान रखता है। सदियों से यह शहर राजाओं, सूफी संतों, व्यापारियों और यात्रियों का केंद्र रहा है। अरावली की पहाड़ियों से घिरा यह शहर आज भी इतिहास और आस्था का संगम प्रस्तुत करता है।
आइए अजमेर के ऐतिहासिक सफर को क्रमबद्ध रूप से समझते हैं।
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1) स्थापना और प्रारम्भिक इतिहास
अजमेर की स्थापना 11वीं शताब्दी में राजपूत शासक अजयपाल चौहान द्वारा की गई मानी जाती है। शहर का नाम मूल रूप से “अजयमेरु” था, जिसका अर्थ है — अजय (अजेय) पहाड़ी नगर।
यह क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, इसलिए यहाँ मजबूत किलों और बस्तियों का विकास हुआ।
2) चौहान वंश और राजपूत काल
अजमेर लंबे समय तक चौहान राजवंश की राजधानी रहा। इस वंश के सबसे प्रसिद्ध शासक Prithviraj Chauhan ने अपने साहस और युद्ध कौशल से इतिहास में विशेष स्थान बनाया।
अजमेर उस समय उत्तर भारत के महत्वपूर्ण शक्ति केंद्रों में गिना जाता था।
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3) दिल्ली सल्तनत का शासन
12वीं शताब्दी के अंत में मोहम्मद गौरी के आक्रमण के बाद चौहान सत्ता का पतन हुआ और अजमेर दिल्ली सल्तनत के अधीन आ गया। इसके बाद यहाँ प्रशासनिक और सांस्कृतिक परिवर्तन देखने को मिले।
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4) मुग़ल काल में अजमेर का महत्व
मुग़ल सम्राट Akbar ने अजमेर को एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित किया। वे अक्सर यहाँ स्थित सूफी संत Khwaja Moinuddin Chishti की दरगाह पर आशीर्वाद लेने आते थे।
इस काल में अजमेर व्यापार, संस्कृति और धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन गया।
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5) प्रमुख किले और ऐतिहासिक स्थल
अजमेर का इतिहास इसके स्थापत्य स्मारकों में जीवित है।
मुख्य स्थल:
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Taragarh Fort — राजस्थान के सबसे पुराने किलों में से एक
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अजमेर शरीफ दरगाह
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आनासागर झील
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मुग़लकालीन संरचनाएँ और बावड़ियाँ
ये स्थल आज भी शहर की ऐतिहासिक विरासत को दर्शाते हैं।
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6) ब्रिटिश काल और आधुनिक विकास
ब्रिटिश शासन के दौरान अजमेर एक प्रशासनिक केंद्र बना। रेल और सड़क संपर्क के विकास से यह क्षेत्र व्यापार और शिक्षा का केंद्र भी बन गया।
स्वतंत्रता के बाद अजमेर राजस्थान राज्य का एक महत्वपूर्ण शहर बनकर उभरा।
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7) रोचक तथ्य
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अजमेर का पुराना नाम अजयमेरु था।
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तारागढ़ किला राजस्थान के सबसे प्राचीन किलों में गिना जाता है।
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मुग़ल शासक अकबर हर वर्ष यहाँ दरगाह शरीफ की यात्रा करते थे।
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शहर व्यापार, शिक्षा और धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र रहा है।
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8) आज का अजमेर
आज अजमेर धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण शहर है। यहाँ देश-विदेश से लाखों पर्यटक और श्रद्धालु प्रतिवर्ष आते हैं।
निष्कर्ष
अजमेर का इतिहास विभिन्न राजवंशों, संस्कृतियों और धार्मिक परंपराओं का संगम है। किलों, दरगाहों और झीलों से सजा यह शहर राजस्थान की ऐतिहासिक पहचान को जीवंत बनाए हुए है।






